लेखक अपने बचपन को कच्चे घर, पयाल के बिछौने, खेतों में घूमने और आम के पेड़ों पर चढ़ने जैसी स्मृतियों के साथ याद करता है। बचपन का संसार साधारण साधनों वाला, लेकिन अनुभवों से भरा हुआ है।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं। इस भाग को पढ़ते समय मुख्य घटनाओं, स्थान और प्रसंग पर ध्यान दें।
लेखक चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव में मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाता था।
सुबह मटर और जौ का चबेना लेना उसकी दिनचर्या का हिस्सा था।
रामलीला के प्रति भी उसका विशेष उत्साह था। इस भाग में पात्रों के व्यवहार और उनके बीच बने संबंध को पाठ के प्रसंग से समझें।