भाषा और शब्द-संपदा
चबेना, पयाल, गुल्ली-डंडा, थापी, रामलीला और तमाशा जैसे शब्द पाठ के ग्रामीण तथा सांस्कृतिक जीवन को समझाते हैं। पाठ में दोपहर और अन्य शब्दों के अर्थ तथा संज्ञा-विशेषण से जुड़े अभ्यास भी हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं। शब्दों और भाषा-प्रयोग को उनके पाठ-संदर्भ के साथ समझना उपयोगी है।
मुख्य बात: चबेना, पयाल, गुल्ली-डंडा, थापी, रामलीला और तमाशा जैसे शब्द पाठ के ग्रामीण तथा सांस्कृतिक जीवन को समझाते हैं। पाठ में दोपहर और अन्य शब्दों के अर्थ तथा संज्ञा-विशेषण से जुड़े अभ्यास भी हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- चबेना, पयाल, गुल्ली-डंडा, थापी, रामलीला और तमाशा जैसे शब्द पाठ के ग्रामीण तथा सांस्कृतिक जीवन को समझाते हैं।
- इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
- इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
- इस उप-विषय की समझ पाठ के दिए गए उदाहरणों और अभ्यासों पर आधारित है।