महावत गैंडे के बारे में एक कथा सुनाता है।
आगे बील यानी झील पर अनेक पक्षियों के झुंड दिखाई देते हैं।
यात्रा-वर्णन में पशु-पक्षियों के साथ जलाशय और प्राकृतिक वातावरण का भी चित्र मिलता है। घटनाओं को उसी क्रम में देखें जिस क्रम में पाठ उन्हें प्रस्तुत करता है।
झुंड, गुच्छा, भीड़, गट्ठर और रेवड़ जैसे समूहवाचक शब्दों का अभ्यास है।
दर्शनीय और प्रशंसनीय जैसे शब्दों के अर्थ तथा वाक्य-प्रयोग भी दिए गए हैं।
पत्र और यात्रा-वर्णन की भाषा स्थानों तथा जीव-जंतुओं से जुड़े शब्दों से समृद्ध है। शब्दों और भाषा-प्रयोग को उनके पाठ-संदर्भ के साथ समझना उपयोगी है।