गंगा अपनी कहानी स्वयं सुनाती है और बताती है कि वह हिमालय की गोद में गोमुख के पास गंगोत्री हिमनद से छोटी धारा के रूप में निकली। गंगोत्री और राजा भगीरथ के तप का भी उल्लेख है।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं। इस भाग को पढ़ते समय मुख्य घटनाओं, स्थान और प्रसंग पर ध्यान दें।
देवप्रयाग में अलकनंदा गंगा से मिलती है।
ऋषिकेश पहुँचने पर नदी मैदान में उतरती है।
उसके किनारों पर साधु-संतों के आश्रम, नगर और कारखाने बसे हैं और नदी उन्हें पानी देती है। इस भाग में पात्रों के व्यवहार और उनके बीच बने संबंध को पाठ के प्रसंग से समझें।