नाटक का आरंभ कपिलवस्तु के राज-उद्यान में होता है। सिद्धार्थ और उनका सखा शाम के समय प्रकृति, पक्षियों और गायों के व्यवहार को देखते हुए उनके स्वभाव और समय के संबंध पर बातचीत करते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं। इस भाग को पढ़ते समय मुख्य घटनाओं, स्थान और प्रसंग पर ध्यान दें।
एक हंस तीर से घायल होकर सिद्धार्थ के पास आता है।
सिद्धार्थ उसकी देखभाल करते हैं।
देवदत्त दावा करता है कि हंस उसका है क्योंकि उसने उसे तीर मारा था, लेकिन सिद्धार्थ उसे देने से इनकार करते हैं। इस भाग में पात्रों के व्यवहार और उनके बीच बने संबंध को पाठ के प्रसंग से समझें।