भाषा और शब्द-संपदा
राज-उद्यान, वेदी, नेपथ्य, प्रतिहारी, राजसभा और महाराजा जैसे शब्द नाटक के वातावरण को बनाते हैं। मंच-संकेत और संवाद साथ मिलकर दृश्य, पात्रों की क्रिया और विचारों को प्रस्तुत करते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं। शब्दों और भाषा-प्रयोग को उनके पाठ-संदर्भ के साथ समझना उपयोगी है।
मुख्य बात: राज-उद्यान, वेदी, नेपथ्य, प्रतिहारी, राजसभा और महाराजा जैसे शब्द नाटक के वातावरण को बनाते हैं। मंच-संकेत और संवाद साथ मिलकर दृश्य, पात्रों की क्रिया और विचारों को प्रस्तुत करते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- राज-उद्यान, वेदी, नेपथ्य, प्रतिहारी, राजसभा और महाराजा जैसे शब्द नाटक के वातावरण को बनाते हैं।
- इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
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- इस उप-विषय की समझ पाठ के दिए गए उदाहरणों और अभ्यासों पर आधारित है।