विवाद महाराजा की सभा तक पहुँचता है।
सिद्धार्थ कहते हैं कि देवदत्त ने हंस को मारा है, जबकि उन्होंने उसे बचाया है।
निर्णय का आधार हंस के जीवन और उसकी रक्षा को माना जाता है। घटनाओं को उसी क्रम में देखें जिस क्रम में पाठ उन्हें प्रस्तुत करता है।
राज-उद्यान, वेदी, नेपथ्य, प्रतिहारी, राजसभा और महाराजा जैसे शब्द नाटक के वातावरण को बनाते हैं। मंच-संकेत और संवाद साथ मिलकर दृश्य, पात्रों की क्रिया और विचारों को प्रस्तुत करते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं।
इस उप-विषय के तथ्य पाठ के दिए गए प्रसंग से ही समझे जा सकते हैं। शब्दों और भाषा-प्रयोग को उनके पाठ-संदर्भ के साथ समझना उपयोगी है।