‘च बलराम च यमुनाया’ को समझने के लिए पाठ का सही कथन कौन-सा है?
○ इत्थं वयं जानीीम: यत् अव्यययीीभावसमास: पूर्वपदप्रधान: भवति।
मया पठितं यत् कृष्णण: च बलराम: च यमुनाया: तटे क्रीीडत: स्मम।
○ वसुदेवसुत: श्रीकृष्णण: आसीीत्।
○ पदस्य य अनुसारम् अर्थं ं बोधयन्ति।
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पाठ में ‘च बलराम च यमुनाया’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com