रहीम के दोहे · Class 6 Hindi
Practise 10 short and long answer questions on रहीम के दोहे from रहीम के दोहे. Try writing your own answer first, then tap the question to compare it with the model answer and read the explanation behind it.
सुई छोटे आकार की होने पर भी उपयोगी काम करती है, जबकि तलवार उस काम को नहीं कर सकती। इसलिए छोटे या कम महत्त्वपूर्ण दिखने वाले व्यक्ति या वस्तु को तुच्छ नहीं समझना चाहिए।
दोहा उपयोगिता को आकार से अलग करके देखने की सीख देता है।
पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते। इसी तरह सज्जन लोग अपनी संपत्ति दूसरों के हित के लिए सँजोते हैं।
प्रकृति के उदाहरण से परोपकार का आदर्श समझाया गया है।
प्रेम का संबंध टूट जाए तो फिर जुड़ने पर भी उसमें गाँठ रह जाती है। इसलिए संबंधों को झटके से तोड़ने के बजाय सावधानी और संवेदनशीलता से निभाना चाहिए।
धागे की गाँठ संबंधों में आई स्थायी दूरी का प्रतीक है।
दोहा पानी को मोती, मनुष्य और चूने के लिए आवश्यक बताता है। यहाँ पानी का अर्थ संदर्भ के अनुसार चमक, मान-सम्मान या मूल गुण की रक्षा से भी जुड़ता है।
रहीम एक शब्द के माध्यम से अलग-अलग वस्तुओं में पानी की उपयोगिता दिखाते हैं।
विपत्ति थोड़े समय के लिए आए तो उससे पता चल जाता है कि कौन हितैषी है और कौन केवल दिखावे का साथी। कठिन समय लोगों के वास्तविक व्यवहार को सामने लाता है।
दोहा संकट को संबंधों की पहचान का अवसर मानता है।
रहीम कहते हैं कि जिह्वा बिना सोचे स्वर्ग-पाताल तक की बातें कह जाती है, लेकिन उसके परिणाम व्यक्ति को भुगतने पड़ते हैं। इसलिए वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए।
दोहा असावधान बोलने और उसके दुष्परिणामों पर ध्यान दिलाता है।
पेड़ फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते। ये उदाहरण बताते हैं कि उपयोगी संपत्ति का वास्तविक महत्त्व दूसरों के काम आने में है। रहीम सज्जन व्यक्ति से भी यही अपेक्षा करते हैं कि वह अपनी सामर्थ्य का उपयोग लोकहित में करे।
प्राकृतिक वस्तुओं का व्यवहार मानवीय सद्गुणों के लिए उदाहरण बनता है।
रहीम प्रेम को धागे के समान मानते हैं। धागा टूटकर फिर जोड़ा जाए तो गाँठ रह जाती है; उसी तरह संबंधों में कटुता आने के बाद पहले जैसी सहजता कठिन हो सकती है। इसलिए बोलचाल और व्यवहार में सावधानी रखकर संबंधों को टूटने से बचाना चाहिए।
दोहा संबंधों की नाजुकता को सरल वस्तु-चित्र के माध्यम से समझाता है।
सुई और तलवार के उदाहरण से रहीम बताते हैं कि छोटा दिखने वाला साधन भी ऐसे काम आ सकता है जो बड़ी वस्तु नहीं कर सकती। इससे दूसरों का मूल्य उनके आकार, पद या बाहरी प्रभाव से नहीं, बल्कि उनकी उपयोगिता और गुणों से आँकने की सीख मिलती है।
दोहा अहंकार से बचने और हर व्यक्ति के योगदान को पहचानने की प्रेरणा देता है।
रहीम के दोहे प्रेम, परोपकार, वाणी-संयम, विनम्रता और संबंधों की रक्षा जैसे जीवन-मूल्य सिखाते हैं। वे पेड़, सरोवर, सुई, तलवार और धागे जैसे सरल उदाहरणों से गहरी बात समझाते हैं। उनके अनुसार मनुष्य को अपनी उपयोगिता दूसरों के हित में लगानी चाहिए और कठिन समय में लोगों के वास्तविक स्वभाव को पहचानना चाहिए।
विभिन्न दोहों में अलग उदाहरण हैं, लेकिन सभी व्यवहार को विवेकपूर्ण और मानवीय बनाने पर बल देते हैं।