पेड़ की बात · Class 6 Hindi
Practise 10 short and long answer questions on पेड़ की बात from पेड़ की बात. Try writing your own answer first, then tap the question to compare it with the model answer and read the explanation behind it.
पाठ के अनुसार सर्दियों के बाद वसंत आया और वर्षा की शुरुआत में दो-एक दिन पानी बरसा। इसके बाद बीज का ढक्कन दरकने लगा और अंकुर बाहर निकला।
वर्णन बीज के अंकुरण को मौसम और पानी से जोड़ता है।
अंकुर का जो भाग मिट्टी के भीतर जाता है, उसे जड़ कहते हैं। जो भाग मिट्टी को भेदकर ऊपर की ओर बढ़ता है, उसे तना कहते हैं।
पाठ जड़ और तने की पहचान उनकी दिशा और स्थान से कराता है।
गमले को कुछ दिन उलटा लटकाने पर पौधे की पत्तियाँ और डालियाँ मुड़कर ऊपर की ओर उठ गईं, जबकि जड़ घूमकर नीचे की ओर लटक गई।
प्रयोग बताता है कि पौधे के भागों की वृद्धि दिशा बदलने पर भी अलग-अलग दिशाओं में होती है।
पेड़-पौधे जड़ों के द्वारा मिट्टी से रस ग्रहण करते हैं। मिट्टी में पानी डालने पर कई द्रव्य घुल जाते हैं और पौधे उन घुले पदार्थों को सोखते हैं।
पाठ जड़ों को मिट्टी से पोषण लेने वाला भाग बताता है।
जड़ों को पानी नहीं मिलता तो पौधे का भोजन ग्रहण करना रुक जाता है। पाठ के अनुसार ऐसी स्थिति में पेड़ मर सकता है।
पानी मिट्टी में घुले द्रव्यों को पौधे तक पहुँचाने में सहायक है।
सूक्ष्मदर्शी से पेड़ की डाल या जड़ में हजारों छोटे नल देखे जा सकते हैं। इन्हीं नलों के माध्यम से मिट्टी से आया रस पेड़ के शरीर में पहुँचता है।
सूक्ष्मदर्शी बहुत छोटे ढाँचे देखने में सहायता करता है।
पाठ के अनुसार पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं। उनमें छोटे-छोटे मुँह होते हैं, जो जरूरत के अनुसार खुलते और बंद होते हैं। सूर्य का प्रकाश मिलने पर पत्ते अंगारक वायु से अंगार अलग करते हैं, जो वृक्ष के संवर्धन में सहायक होता है।
पाठ जड़ों और पत्तों के भोजन ग्रहण करने के अलग-अलग तरीकों का वर्णन करता है।
पाठ में उलटे लटकाए गए गमले का प्रयोग बताया गया है। पौधे की पत्तियाँ और डालियाँ ऊपर की ओर मुड़ गईं, जबकि जड़ नीचे की ओर बढ़ी। इससे समझाया गया है कि पौधे को जिस तरह रखा जाए, जड़ नीचे और तना ऊपर की ओर बढ़ने की प्रवृत्ति दिखाते हैं।
प्रयोग पौधे की वृद्धि-दिशा को प्रत्यक्ष अवलोकन से समझाता है।
मनुष्य भोजन के लिए दाँतों से कठोर चीजें खा सकता है, जबकि छोटे बच्चों के दाँत न होने पर वे दूध पीते हैं। पेड़-पौधों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे तरल द्रव्य और वायु से भोजन ग्रहण करते हैं। जड़ें मिट्टी से रस लेती हैं और पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं।
तुलना से पौधों के पोषण की अलग प्रक्रिया समझाई गई है।
पाठ बताता है कि पेड़-पौधे प्रकाश चाहते हैं और प्रकाश न मिलने पर जीवित नहीं रह सकते। खिड़की के पास रखे गमले की पत्तियाँ और डालियाँ अँधेरे से बचकर प्रकाश की ओर बढ़ती हैं। पत्ते सूर्य-ऊर्जा का उपयोग करके अपने पोषण की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
अवलोकन और प्रकाश की भूमिका को जोड़कर पौधों की आवश्यकता स्पष्ट की गई है।