परीक्षा · Class 6 Hindi
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चालीस वर्ष सेवा करने के बाद सरदार सुजानसिंह को लगा कि उनकी अवस्था ढल गई है और वे राज-काज की जिम्मेदारी पहले जैसी शक्ति से नहीं सँभाल पाएँगे।
उनकी विनती उम्र और जिम्मेदारी के प्रति ईमानदार आकलन से जुड़ी है।
राजा साहब ने सरदार सुजानसिंह की प्रार्थना स्वीकार की, लेकिन शर्त रखी कि रियासत के लिए नया दीवान उन्हें स्वयं खोजना होगा।
राजा पुराने दीवान के अनुभव का सम्मान करते हुए चयन की जिम्मेदारी भी उन्हीं को देते हैं।
दीवान का पद प्रतिष्ठित था, इसलिए अलग-अलग स्थानों से लोग अपनी किस्मत आजमाने आए। उम्मीदवार अपनी पोशाक और व्यवहार से प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे थे।
पद की प्रतिष्ठा और चयन की आशा ने अनेक उम्मीदवारों को आकर्षित किया।
कुछ लोग जो पहले देर तक सोते थे, वे सुबह बगीचे में घूमने लगे। जो नौकरों से कठोरता से बोलते थे, वे अब आदर से बात करने लगे; किताबों से दूर रहने वाले भी बड़े ग्रंथ पढ़ते दिखे।
ये उदाहरण बताते हैं कि उम्मीदवार चयन के लिए अस्थायी रूप से सदाचार का प्रदर्शन कर रहे थे।
वे उम्मीदवारों के बाहरी रूप या मीठी बातों से प्रभावित नहीं हो रहे थे। वे उनके वास्तविक स्वभाव को परखना चाहते थे, जैसे जौहरी किसी वस्तु की असली गुणवत्ता पहचानता है।
उपमा उनके अनुभव और लोगों की असलियत पहचानने की क्षमता को दर्शाती है।
नाले में कीचड़ था और चढ़ाई ऊँची थी। गाड़ी अनाज से भरी हुई थी तथा बैल कमजोर थे, इसलिए जोर लगाने पर भी गाड़ी ऊपर नहीं चढ़ पा रही थी।
स्थिति किसान की असहायता और तत्काल सहायता की जरूरत पैदा करती है।
अधिकांश खिलाड़ियों ने किसान को देखा, लेकिन उसकी मदद करने की इच्छा नहीं दिखाई। वे अपने खेल और स्वार्थ में लगे रहे। इससे स्पष्ट हुआ कि उनका दिखावटी सदाचार वास्तविक करुणा में नहीं बदला था।
किसान की कठिनाई उम्मीदवारों के चरित्र की परीक्षा बन जाती है।
उम्मीदवारों ने पहले विनम्रता और सदाचार का प्रदर्शन किया था, पर किसान की कठिनाई सामने आने पर उनकी असलियत दिखाई देने लगी। अधिकांश लोग मदद से बचते रहे, जबकि एक व्यक्ति स्वयं चोटिल होने के बावजूद सहायता के लिए आगे आया। इससे उसके व्यवहार की सच्चाई सामने आई।
व्यवहार की वास्तविक परीक्षा अनायास आए अवसर पर होती है, न कि दिखावे में।
सरदार सुजानसिंह केवल डिग्री, पोशाक या मीठी भाषा देखकर दीवान चुनना नहीं चाहते थे। वे उम्मीदवारों की वास्तविक दया, साहस और जिम्मेदारी को व्यवहार में परख रहे थे। किसान की मदद वाला प्रसंग उनके लिए चरित्र पहचानने का अवसर बना।
कहानी योग्यता के साथ मानवीय गुणों को नेतृत्व के लिए आवश्यक मानती है।
कहानी में उम्मीदवारों की परीक्षा किसी लिखित प्रश्नपत्र से नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की परिस्थिति से होती है। किसान की गाड़ी फँसने पर उनके व्यवहार से पता चलता है कि कौन सचमुच दयालु और मददगार है। इसलिए शीर्षक चरित्र की व्यावहारिक जाँच को दर्शाता है।
कहानी की निर्णायक घटना पात्रों के वास्तविक गुण सामने लाती है।