पहली बूँद · Class 6 Hindi
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कविता में पहली बूँद पावस के प्रथम दिवस धरती पर आती है।
आरंभिक पंक्ति में वर्षा के पहले दिन का उल्लेख है।
पहली बूँद पड़ते ही धरती से अंकुर फूट पड़ता है और नवजीवन की शुरुआत होती है। सूखी धरती पर हरियाली मुसकराने लगती है।
वर्षा को जीवन जगाने वाली शक्ति के रूप में चित्रित किया गया है।
धरती लंबे समय से सूखी और प्यासी दिखाई गई है। उस पर पहली बूँद पड़ना जैसे प्यास बुझाने वाला अमृत मिलना है। इससे धरती में फिर से जीवन और ताजगी आती है।
अमृत का बिंब वर्षा की जीवनदायी भूमिका को उभारता है।
कवि ने हरी दूब को वसुंधरा की रोमावली-सी बताया है। पहली वर्षा के बाद धरती पर उगी दूब ऐसे दिखाई देती है जैसे धरती के शरीर पर महीन रोम उग आए हों।
यह उपमा धरती की हरियाली को दृश्यात्मक बनाती है।
आसमान में बादलों को उड़ते सागर जैसा बताया गया है और बिजली को उनके स्वर्णिम पंखों जैसा रूप दिया गया है। बादलों की गर्जना धरती की तरुणाई को जगाने वाले नगाड़ों जैसी लगती है।
इन बिंबों से वर्षा के आगमन का भव्य और गतिशील दृश्य बनता है।
इस पंक्ति में आकाश की तुलना नीली आँखों से की गई है। बादलों को काली पुतली जैसा कहने से आकाश और बादलों का रंग-रूप आँख की संरचना जैसा दिखाई देता है।
उपमा और दृश्य-कल्पना से प्रकृति का मानवीय रूप बनता है।
सूखी धरती को बूढ़ी कहकर उसकी थकान और निर्जीवता दिखाई गई है। वर्षा आने पर वह फिर हरी-भरी और फसल से भरपूर बनना चाहती है। पहली बूँद उसके नए जीवन की आशा जगाती है।
कविता में धरती का मानवीकरण करके सूखे से हरियाली तक का परिवर्तन दिखाया गया है।
पहली बूँद के साथ अंकुर फूटता है, सूखी धरती की प्यास बुझती है और दूब हरी हो जाती है। बादल और बिजली वातावरण में हलचल पैदा करते हैं। इन दृश्यों के माध्यम से वर्षा को प्रकृति में नई ऊर्जा और जीवन लाने वाली शक्ति बताया गया है।
कविता के सभी प्रमुख बिंब सूखेपन से जीवन की ओर बढ़ते परिवर्तन को जोड़ते हैं।
धरती के सूखे अधरों पर बूँद गिरने और धरती की चिर-प्यास बुझने का वर्णन धरती को मनुष्य की तरह प्रस्तुत करता है। बादलों को नगाड़े बजाकर धरती की तरुणाई जगाने वाला कहा गया है।
मानवीकरण से प्राकृतिक घटनाएँ भावनात्मक और सजीव बन जाती हैं।
कविता वर्षा की पहली बूँद से प्रकृति में होने वाले परिवर्तन का सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है। सूखी धरती की प्यास बुझती है, अंकुर निकलते हैं और हरियाली लौटती है। कविता प्रकृति की जीवनदायी शक्ति तथा वर्षा के आगमन से पैदा होने वाली आशा और उल्लास को व्यक्त करती है।
कविता का आरंभ, बिंब और समापन सभी वर्षा से उपजे नवजीवन पर केंद्रित हैं।