मैया मैं नहिं माखन खायो · Class 6 Hindi
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इस पद में बालक कृष्ण अपनी माँ यशोदा से कह रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया।
पद की पहली पंक्ति ही वक्ता और उसका कथन स्पष्ट करती है।
कृष्ण कहते हैं कि सुबह होते ही मधुबन ने उन्हें गायों के पीछे भेज दिया था। वे यह भी कहते हैं कि वे चार पहर तक बंसीवट में भटकते रहे और साँझ को घर लौटे।
कृष्ण अपनी अनुपस्थिति और दिनचर्या को सफाई के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
कृष्ण कहते हैं कि वे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए वे छींके तक कैसे पहुँच सकते थे। इस तर्क से वे माखन खाने के आरोप को नकारते हैं।
बाल-सुलभ सफाई में कृष्ण अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता का हवाला देते हैं।
कृष्ण कहते हैं कि सभी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और उन्होंने जबरन उनके मुँह पर माखन लगा दिया। वे यशोदा से कहते हैं कि वह दूसरों की बातों पर विश्वास कर रही हैं।
कृष्ण आरोप को दूसरों की शरारत बताकर अपनी रक्षा करते हैं।
कृष्ण के अनुसार यशोदा बहुत भोली हैं, इसलिए वे ग्वाल-बालों की बातों पर विश्वास कर लेती हैं। कृष्ण इस कथन से माँ को मनाने और अपनी सफाई को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करते हैं।
यह संबोधन बाल-कृष्ण की चतुराई और माँ के साथ निकटता दिखाता है।
सूरदास के पद के अंत में यशोदा हँस पड़ती हैं और कृष्ण को अपने हृदय से लगा लेती हैं।
माँ का व्यवहार डाँट या दंड के बजाय स्नेहपूर्ण अपनापन दिखाता है।
कृष्ण अपनी छोटी बाँहों का तर्क देते हैं, दिन भर गायों के पीछे रहने की बात कहते हैं और आरोप ग्वाल-बालों पर डालते हैं। वे माँ को भोली कहकर यह जताते हैं कि वह दूसरों की बातों में आ गई हैं। इन बातों से उनकी चंचलता और सहज चतुराई प्रकट होती है।
कृष्ण के तर्क गंभीर बचाव से अधिक बाल-लीला और नटखटपन का आनंद देते हैं।
कृष्ण माँ के सामने निश्चिंत होकर अपनी सफाई देते हैं और उनसे शिकायत भी करते हैं। यशोदा उनकी बात सुनकर अंत में हँसती हैं और उन्हें गले लगा लेती हैं। इससे माँ-बेटे के संबंध में अपनापन, स्नेह और बाल-लीला की मधुरता दिखाई देती है।
अंत की प्रतिक्रिया पद के भाव को वात्सल्य रस से भर देती है।
कृष्ण माखन खाने से इनकार करते हुए कई बाल-सुलभ तर्क देते हैं और दूसरों पर दोष लगाते हैं। उनकी बातों में नटखट हास्य है, जबकि यशोदा का अंत में हँसकर उन्हें गले लगाना वात्सल्य भाव को प्रकट करता है।
कृष्ण की चतुर सफाई और यशोदा का स्नेह दोनों मिलकर पद को मधुर बनाते हैं।
पद में बालकृष्ण की नटखट लीला दिखाई गई है। माखन खाने के आरोप पर वे भोलेपन और चतुराई से सफाई देते हैं, ग्वाल-बालों पर दोष लगाते हैं और माँ को मनाने की कोशिश करते हैं। यशोदा अंत में हँसकर उन्हें गले लगा लेती हैं। इस प्रकार पद में वात्सल्य, हास्य और बाल-स्वभाव का सुंदर चित्रण है।
पद का संवाद और उसका स्नेहपूर्ण अंत केंद्रीय भाव को स्पष्ट करते हैं।