मेरी माँ · Class 6 Hindi
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भगत सिंह ने बिस्मिल को होनहार, सुंदर और योग्य नौजवान बताया था। उन्होंने कहा कि दूसरे समय या स्थान पर जन्म लेने पर वे सेनाध्यक्ष बन सकते थे।
प्रस्तावना में भगत सिंह का कथन बिस्मिल की क्षमता का परिचय देता है।
जब बिस्मिल लखनऊ कांग्रेस जाना चाहते थे, तब दादी और पिता विरोध करते रहे, लेकिन माँ ने उन्हें खर्च दिया। सेवा-समिति में उनके काम का भी माँ ने उत्साह बढ़ाया, भले ही उन्हें घर में डाँट सहनी पड़ती थी।
माँ का समर्थन बिस्मिल के सार्वजनिक जीवन और आत्मविश्वास के लिए महत्त्वपूर्ण था।
वकील ने उनसे पिता के हस्ताक्षर करने को कहा, लेकिन बिस्मिल ने इसे धर्म-विरुद्ध और पाप समझा। मुकदमा खारिज होने की आशंका के बावजूद उन्होंने झूठे हस्ताक्षर नहीं किए।
यह घटना सत्यनिष्ठा को निजी लाभ से ऊपर रखने का उदाहरण है।
दादी और पिता बिस्मिल के विवाह के लिए आग्रह करते थे, लेकिन माँ मानती थीं कि शिक्षा पूरी होने के बाद ही विवाह करना उचित है।
माँ शिक्षा को जीवन की तैयारी का आवश्यक हिस्सा मानती थीं।
माँ ने घर के काम पूरे करने के बाद समय निकालकर पढ़ना शुरू किया। वे शिक्षित पड़ोसिनों से अक्षर-बोध करती थीं और धीरे-धीरे देवनागरी पुस्तकें पढ़ने लगीं।
उनकी शिक्षा स्वप्रेरणा, परिश्रम और उपलब्ध अवसरों के उपयोग का उदाहरण है।
माँ का सबसे बड़ा आदेश था कि किसी की प्राणहानि न हो और शत्रु को भी प्राणदंड न दिया जाए। वे क्रांतिकारी जीवन में भी जीवन की रक्षा को महत्त्व देती थीं।
यह आदेश संघर्ष के बीच भी मानवीयता बनाए रखने की सीख देता है।
माँ ने बिस्मिल का उत्साह बढ़ाया, शिक्षा का महत्त्व समझाया और संकट में संकल्प न छोड़ने की दृढ़ता दी। उन्होंने सत्य के पक्ष में खड़े होने और देश-सेवा करने की प्रेरणा दी। बिस्मिल स्वयं अपने जीवन, साहस और शिक्षा का श्रेय माँ तथा गुरु सोमदेव को देते हैं।
आत्मकथात्मक अंश में बिस्मिल सीधे अपने चरित्र-निर्माण का श्रेय माँ को देते हैं।
माँ कम उम्र में विवाह के बाद गृहकार्य सीखती हैं और घर की जिम्मेदारियाँ निभाती हैं। बाद में वे स्वयं पढ़ने की इच्छा जगाती हैं और काम के बाद समय निकालकर देवनागरी सीखती हैं। उनका जीवन बताता है कि लगन और नियमित प्रयास से नई शिक्षा प्राप्त की जा सकती है।
उनका उदाहरण जिम्मेदारियों के बीच भी सीखते रहने का महत्त्व दिखाता है।
वकील के आग्रह और मुकदमा खारिज होने की आशंका के बावजूद बिस्मिल झूठे हस्ताक्षर नहीं करते। वे इसे धर्म-विरुद्ध मानते हैं और अपने निर्णय पर अडिग रहते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि माँ से मिली नैतिक शिक्षा उनके व्यवहार में दिखाई देती है।
यह घटना विचारों और आचरण के बीच एकरूपता का उदाहरण है।
बिस्मिल अपनी माँ को जीवन, साहस, शिक्षा और देश-सेवा की प्रेरणा का स्रोत मानते हैं। वे कहते हैं कि अनेक जन्मों तक प्रयास करने पर भी माँ के ऋण से पूरी तरह उऋण होना कठिन है। उनके शब्दों में माँ के प्रेम, दृढ़ता और उपदेशों के प्रति गहरी कृतज्ञता है।
आत्मकथात्मक संबोधन में कृतज्ञता और माँ के प्रभाव को केंद्र में रखा गया है।