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‘क्रूूरं कर्म यस्य य’ से जुड़ा हुआ सही कथन कौन-सा है?

Question
‘क्रूूरं कर्म यस्य य’ से जुड़ा हुआ सही कथन कौन-सा है?
यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे एकस्मिन् एव विभक्तौ तौ भवत: तदा समानाधिकरण-बहुव्रीहि: भवति।
(क्रूूरं कर्म यस्य य स:) (v) सिंहवाहना दुर्गा महिषासुरस्य वधम् अकरोत्।
व्यधिकरण-बहुव्रीहि: समास: भवति।
(चत्वाारि मुखानि यस्य य स:) (ii) चतुर्भुज: विष्णुणु: सृष्टेटे: पालनं करोति।
Answer
(क्रूूरं कर्म यस्य य स:) (v) सिंहवाहना दुर्गा महिषासुरस्य वधम् अकरोत्।
Detailed Explanation
पाठ में ‘क्रूूरं कर्म यस्य य’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
‘यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘क्रूूरं कर्म यस्य य’ से जुड़ा हुआ सही कथन कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘समास भवति’ के संदर्भ में निम्न में से कौन-सी बात पाठानुसार सही है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: पाठ में ‘चत्वाारि मुखानि यस्य य’ का उल्लेख किस सही कथन के साथ हुआ है? Sanskrit · Unit 7 - समासा:

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