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‘यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है?

Question
‘यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है?
(चत्वाारि मुखानि यस्य य स:) (ii) चतुर्भुज: विष्णुणु: सृष्टेटे: पालनं करोति।
(क्रूूरं कर्म यस्य य स:) (v) सिंहवाहना दुर्गा महिषासुरस्य वधम् अकरोत्।
यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे एकस्मिन् एव विभक्तौ तौ भवत: तदा समानाधिकरण-बहुव्रीहि: भवति।
55 समासा: 4. बहुव्रीहि: (i) चतुर्मुख: ब्रह्मा सृष्टिरचनां करोति।
Answer
यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे एकस्मिन् एव विभक्तौ तौ भवत: तदा समानाधिकरण-बहुव्रीहि: भवति।
Detailed Explanation
पाठ में ‘यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
‘क्रूूरं कर्म यस्य य’ से जुड़ा हुआ सही कथन कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘समास भवति’ के संदर्भ में निम्न में से कौन-सी बात पाठानुसार सही है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: पाठ में ‘चत्वाारि मुखानि यस्य य’ का उल्लेख किस सही कथन के साथ हुआ है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘त्रीणि नेत्राणि यस्य य’ से जुड़ा हुआ सही कथन कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा:

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