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‘4. बहुव्रीहि i चतुर्मुख’ के संदर्भ में निम्न में से कौन-सी बात पाठानुसार सही है?

Question
‘4. बहुव्रीहि i चतुर्मुख’ के संदर्भ में निम्न में से कौन-सी बात पाठानुसार सही है?
द्वे पदे एकस्मिन् एव विभक्तौ तौ भवत: तदा समानाधिकरण-बहुव्रीहि: भवति।
यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे एकस्मिन् एव विभक्तौ तौ भवत: तदा समानाधिकरण-बहुव्रीहि: भवति।
(सिंह: वाहनं यस्याया: सा) उल्लिखितवाक्येयेषु रेखािंतपदेषु किमपि पदं प्रधानं नास्ति।
55 समासा: 4. बहुव्रीहि: (i) चतुर्मुख: ब्रह्मा सृष्टिरचनां करोति।
Answer
55 समासा: 4. बहुव्रीहि: (i) चतुर्मुख: ब्रह्मा सृष्टिरचनां करोति।
Detailed Explanation
पाठ में ‘4. बहुव्रीहि i चतुर्मुख’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
‘यदा बहुव्रीहिसमासे द्वे पदे’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘क्रूूरं कर्म यस्य य’ से जुड़ा हुआ सही कथन कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘समास भवति’ के संदर्भ में निम्न में से कौन-सी बात पाठानुसार सही है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: पाठ में ‘चत्वाारि मुखानि यस्य य’ का उल्लेख किस सही कथन के साथ हुआ है? Sanskrit · Unit 7 - समासा:

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