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‘धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं’ का पाठ में वर्णित रूप कौन-सा है?

Question
‘धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं’ का पाठ में वर्णित रूप कौन-सा है?
परं स्वार्थरता: मानवा: विकासं प्रति अन्धधधावनशीीला: निर्ममभावेन वृक्षान् कृन्तन्ति।
धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं भाारतीयय: एवव अस्मि।
एववं संस्कृकृतभाषाधिगमायय सर्वथाा उपयुुक्ततमेेतत् स्थाानम्।
समााजस्य विघटनस्य काारणमपि धार्मिक-सहिष्णुुतायाा: अभावव: एवास्ति।
Answer
धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं भाारतीयय: एवव अस्मि।
Detailed Explanation
पाठ में ‘धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
‘धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं’ के बारे में पाठ में कौन-सी बात स्पष्ट की गई है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम् पाठ के उदाहरण में ‘स्वच्छं छं कर्त्तुं ं’ के बारे में क्या बताया गया है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम् ‘खदायिनी एषाा स्स्थिति ययत’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम् ‘वृक्षाणाम् अवदानविषये श्लोलोकोऽयं’ का पाठ में वर्णित रूप कौन-सा है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम्

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