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‘इति अव्यययस्य य प्रयोगेण’ को समझने के लिए पाठ का सही कथन कौन-सा है?

Question
‘इति अव्यययस्य य प्रयोगेण’ को समझने के लिए पाठ का सही कथन कौन-सा है?
उल्लिखितेषु वाक्येयेषु रेखािंतपदेषु चतस्र: विशेषता: सन्ति —
(कमले इव नेत्रे) (iii) तस्याया: चन्द्रमुखं दृष्ट्ट्वा स: मोहित: अभवत्।
(कृष्णण: च एष: सर्प:/कृष्णण: सर्प:) (ii) महादेवीी करुणां करोतु।
इति अव्यययस्य य प्रयोगेण उपमानोपमेय-कर्मधारयसमासस्य विग्रह: भवति। किन्तु विशेषण-
Answer
इति अव्यययस्य य प्रयोगेण उपमानोपमेय-कर्मधारयसमासस्य विग्रह: भवति। किन्तु विशेषण-
Detailed Explanation
पाठ में ‘इति अव्यययस्य य प्रयोगेण’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
‘च एष सर्प:/कृष्णण सर्प’ के बारे में पाठ में कौन-सी बात स्पष्ट की गई है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘नपुंसकलिङे स्त्रीलिङे वा भवन्ति’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘यत् द्विगुसमासेषु प्रथमशब्दद’ के संबंध में सही पाठ्य-तथ्य कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘एतेषु विशेष्यपदम् अथवा उपमेयपदम्’ को समझने के लिए पाठ का सही कथन कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा:

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