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‘च एष सर्प:/कृष्णण सर्प’ के संदर्भ में निम्न में से कौन-सी बात पाठानुसार सही है?

Question
‘च एष सर्प:/कृष्णण सर्प’ के संदर्भ में निम्न में से कौन-सी बात पाठानुसार सही है?
(सिंह इव पुरुष:/पुरुष: सिंह: इव) (ii) देव्याया: कमलनेत्रे े दृष्ट्वा ा भक्तत: प्रसन्नन: अभवत्।
एतेषु विशेष्यपदम् अथवा उपमेयपदम् एव प्रधानं भवति।
(कमले इव नेत्रे) (iii) तस्याया: चन्द्रमुखं दृष्ट्ट्वा स: मोहित: अभवत्।
(कृष्णण: च एष: सर्प:/कृष्णण: सर्प:) (ii) महादेवीी करुणां करोतु।
Answer
(कृष्णण: च एष: सर्प:/कृष्णण: सर्प:) (ii) महादेवीी करुणां करोतु।
Detailed Explanation
पाठ में ‘च एष सर्प:/कृष्णण सर्प’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
‘च एष सर्प:/कृष्णण सर्प’ के बारे में पाठ में कौन-सी बात स्पष्ट की गई है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘नपुंसकलिङे स्त्रीलिङे वा भवन्ति’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘यत् द्विगुसमासेषु प्रथमशब्दद’ के संबंध में सही पाठ्य-तथ्य कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा: ‘एतेषु विशेष्यपदम् अथवा उपमेयपदम्’ को समझने के लिए पाठ का सही कथन कौन-सा है? Sanskrit · Unit 7 - समासा:

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