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‘बहुव्रीहिसमासे यदा द्वे पदे’ के बारे में पाठ में कौन-सी बात स्पष्ट की गई है?

Question
‘बहुव्रीहिसमासे यदा द्वे पदे’ के बारे में पाठ में कौन-सी बात स्पष्ट की गई है?
(सिंह इव पुरुष:/पुरुष: सिंह: इव) (ii) देव्याया: कमलनेत्रे े दृष्ट्वा ा भक्तत।
बहुव्रीहिसमासे यदा द्वे पदे पृथक्-पृथक्- विभक्तौ भिन्नन-लिङे वा तदा।
उपमानपदस्य पश्चाचात् ‘इव’ इति अव्यययस्य य प्रयोगेण उपमानोपमेय-कर्मधारयसमासस्य विग्रह।
समासानां विभाजनं मुख्ययत: चतुर्धा भवति —
Answer
बहुव्रीहिसमासे यदा द्वे पदे पृथक्-पृथक्- विभक्तौ भिन्नन-लिङे वा तदा।
Detailed Explanation
पाठ में ‘बहुव्रीहिसमासे यदा द्वे पदे’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
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