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पाठ के उदाहरण में ‘धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं’ के बारे में क्या बताया गया है?

Question
पाठ के उदाहरण में ‘धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं’ के बारे में क्या बताया गया है?
काारणमपि धार्मिक-सहिष्णुुतायाा: अभावव: एवास्ति। यदि अस्मााकं मनसि ‘वययं सर्वेे
भाारतस्य उन्ननत्यर्थंं प्रयतिष्येे भाारतीयाां संस्कृतिं च उन्नेेष्यामि‑एष मम संल्पप:।
क्रोधं संययम्य उचिताानुचितं विचार्य एवव कोऽपि निर्णयय: कर्तव्य:।
धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं भाारतीयय: एवव अस्मि।
Answer
धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं भाारतीयय: एवव अस्मि।
Detailed Explanation
पाठ में ‘धर्मस्य दृष्ट्याा अहं केववलं’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com
पाठ में ‘भाारतस्य उन्ननत्यर्थंं प्रयतिष्येे’ का उल्लेख किस सही कथन के साथ हुआ है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम् ‘काारणमपि धार्मिक-सहिष्णुुतायाा अभावव’ से संबंधित पाठ्य-सूचना कौन-सी है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम् ‘ध्वनिमुद्रिकाा अपि इत’ के संदर्भ में पाठ में कौन-सा कथन दिया गया है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम् ‘प्रत्यक्षम् अप्रत्यक्षं सर्वविधं’ के बारे में पाठ में कौन-सी बात स्पष्ट की गई है? Sanskrit · Unit 3 - अनुच्छेदलेखनम्

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