संस्कृत में ' संयोग ' एक महत्त्ववपूर्ण संज्ञाा के रूप में प्रााप्त…
पर दीर्घादि रूप में ' एकाादेश ' भी होताा है।
क्त ( त ) और क्तवतु ( तवत् ) प्रत्यों को निष्ठाा कहते हैं— ' क्तक्तवत…
महत् में अन्तिम वर्ण ' त् ' से पूर्ववर्ती ' ह ' में विद्यमाान ' अ ' उप…