‘मययूर अतिसुन्दर प्रतिभाति’ के बारे में पाठ में कौन-सी बात स्पष्ट की गई है?
○ मययूरपिच्छंछं विनाा श्रीीकृष्णस्य शृङाार: अपूर्ण: मन््यतेे।
○ अनेेन साामान््यजीववनं संटाापन्नंनं भवति।
बहुरङ: मययूर: अतिसुन्दर: प्रतिभाति।
○ अद्यत्वेे छात्राणाां मूलसमस्याा स्वाध्यायय स्य अभावव: अस्ति।
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पाठ में ‘मययूर अतिसुन्दर प्रतिभाति’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com