कारक परिचय : ' यथा वागीश मित् ' के बारे में क्या बताया गया है ?
○ कर्म— क्रिया के सम्पाादन में कर्ता के सर्वाधिक अभीष्ट को कर्म
यथा— वागीश : मित्राय लेखनीं दाति। इस वाक्य में मित्र को लेखनी
○ यथा— गौरी जलेन मुखंं प्रक्षाालयति। यहाँ ' प्रक्षाालन ' क्रिया का प…
○ यथा— रामस्य पुत्र : कुश : गच्छति। यहाँ रामस्य पद में षष्ठीठी विभक्…
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यह विवरण अध्याय में स्पष्ट रूप से दिया गया है। — Examisthan.com