‘सूर्यातपे चालयति कर्षत’ का पाठ में वर्णित रूप कौन-सा है?
सूर्यातपे, चालयति, कर्षत:, अन्नोनोत्पाादने, हलम्, योगदानम्
○ कारयानयो:, आक्रोोशपूर्वकम्, क्रुद्धौुद्धौ, दोषारोपणम्, आरक्षीी, क्षतिग्रस्तेते, कारयाने,
○ श्रावणमासस्यय, वर्षाया:, अनुभवन्ति, कुर्वन्ति
○ रित:, पर्वता:, दृष्ट्ट्वा, आतंवादिनौ,
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पाठ में ‘सूर्यातपे चालयति कर्षत’ के संदर्भ में यही तथ्य दिया गया है। — Examisthan.com